Skip to main content

Posts

दिखाई देता

दिखाई देता  -------------------------------------------- धुँआ सा कैसा दिखाई देता है हर एक तन्हां दिखाई देता है सवाल के ख्याल देख लेता है चेहरा कोई यूँ भी पढ लेता है मन की बातें जो कर लेता है उन्हें भी देख ही कहीं लेता है छुपा लाख कोई रख लेता है असली रंग वो देख ही लेता है ज़माना अजब सा देखा "अरु" हर कोई खुद को हूर कह लेता है ------------------------------------------- आराधना राय "अरु " Rai Aradhana ©

दिखाई देता है

   -------------------------------------------- धुँआ सा कैसा दिखाई देता है   हर एक तन्हां दिखाई देता है  सवाल के ख्याल देख लेता है  चेहरा कोई यूँ भी पढ लेता है  मन की बातें जो कर लेता है     उन्हें भी देख ही कहीं लेता है  छुपा  लाख कोई रख लेता है    असली रंग वो देख ही लेता है   ज़माना अजब सा देखा "अरु"  हर कोई खुद को हूर कह लेता है  -------------------------------------------   आराधना राय "अरु " Rai Aradhana ©

शहर की बात

शहर की बात --------------------------------- अब किस शहर की बात हो  जहाँ सुबह सी कोई रात हो हर शख़्स ही जहाँ खास हो अवाम की जहाँ पे बात हो  ना भूख रोटी को  ढूँढती हो  कफन ज़िंदगी ना ओढ़ी हो यूँ इक सरज़मी की बात हो उजालों पर यूँ ना सवाल हो जहॉ रोशन हर ज़हन यूँ हो हर बात पे ना कोई बवाल हो कोई ख़्वाब हसीन नसीब हो "अरु" मंज़िले कुछ करीब हो आराधना राय "अरु" ------------------------------------------------ कफन -श्राउड, मृत्यु का सामान सरज़मी- क्षेत्र, देश अवाम- जनता , पब्लिक शख़्स- आदमी ,,इंसान

कौन सी बात

         साभार गूगल  -----------------------------------------------------           कौन सी बात ---------------------------------------------------- रोप बबूल को आम की बात की कर्म-विधान की कौन सी बात की ----------------------------------------------- जल रहा था देश, पेट की आग से मंदिर जला, मस्जिद को तोड़ कर जाने किस की ख़ुदा की तलाश की हृदय पे मरहम लगा नहीं जो सकते क्यों फिर बस देह- सुगंध की बात की -------------------------------------------------------- जली सैकड़ों ही बस्तियाँ क्या बात थी हम ने जाने किस सभ्यता की बात की पशु की नहीं पशुता से नीची ये बात की क्रांति पे "अरु" अशांत हो कर ही बात की  ------------------------------------------------ आराधन राय "अरु " Rai Aradhana © स्वरचित
सितम ----------------------------------------- खुल गए रास्ते ,बात अब सब आम हुई यूँ ही झंडे पकड़ हाथ में अब हड़ताल हुई देखों जिसे चेहरा ही अजब लिए फिरता है भीड़ में आदमी दीवाना सा क्यों लगता है हर एक शख़्स तुला है अपनी ही कहने को बिसात पे रखा हुआ  प्यादा सा ही लगता है रोज़ बढ़ जाती है गरीब कि लड़की की तरह बढ़ती मँहगाई दिनों दिन ये भी क्या खूब है गरीब कि थाली भी  खाली ही रहने वाली है रोटी की बातें फैशन सा सितम ढाने वाली है ग़रीब की दुआओ का इनाम कोई यूँ  ले गया दवा के नाम पे 'अरु' कैसा वो दर्द साथ ले गया आराधना राय "अरु"  

चाँद

साभार गूगल चाँद तुमने  ना देखा होगा  बादलों में छुप गया होगा काली सी सुनसान रातों को चाँदनी से लिपट गया होगा महक रही है आँगन में मेरे बहके से  हरसिंगार की तरह उसी को देखने वो आया होगा उसे किसी सोच में पाया होगा सांसों में महके जो ख्याल होगा 'अरु' वो तेरे ही साथ यूँ भी होगा आराधना राय "अरु" 

آرزو आरज़ू

साभार गूगल तज्दीद-ए-आरज़ू ------------------------------------------------- जिसे भूले ही नहीं याद क्या उसको करें उसकी हर बात दिल में ही बसा रखी है हर लम्हा उसे सोचते ही गुज़रता रहा यूँ जैसे सहरा से कोई आबशार हो निकला उसकी बातें में तज्दीद-ए-आरज़ू है तेरी उसका ज़िक्र 'अरु' लगता है फरिश्तों सा आराधन राय 'अरु ' --------------------------------------------------------- Renewing desire- तज्दीद-ए-आरज़ू, इच्छा,        آرزو   ================================ جسے بھولے ہی نہیں یاد کیا اس کو کریں اس کی ہر بات دل میں ہی حل رکھی ہے ہر لمحہ اس خیال ہی گزرتا رہا یوں اس کی باتیں میں تجدید-اے-آرزو ہے تیری جیسے صحرا سے کوئی آبشار ہو نکلا اس کا ذکر 'ار' لگتا ہے فرشتوں سا آرادن رائے 'ار'

आहट

तेरे कदमों की आहट पता मेरा क्यों बताती है चले हो साथ मेरे तो निगाहों में बसें ही रहना मेरे दिल के आईने मैं रोज़ चमकती ही रहना कहीं भी धूल मिल जाए तो साफ करते रहना बहुत आसान है किसी से भी प्यार यूँ कर लेना  मुश्किल है किसी के गुनाहों को माफ कर देना मेरी दुनियाँ, तेरी दुनियाँ की बातें पूछते रहना अजब से कायदें कानूनों की 'अरु ' कैद में रहना   आराधना राय  'अरु' नोट - ये नज़्म  मैंने ख़ुद  को एक पुरुष ------आदमी  मान कर  लिखी है  पता नहीं कितनी क़ामयाब  हुईं हूँ , स्त्री  होकर पुरुष कि भाषा बोलने में  ये आप बतायेंगे।   

गुज़रती हूँ گزرتی ہوں

साभार गूगल कोई वादा नहीं फिर भी जाने क्यों मिलती हूँ तुम्हे देख कर जाने क्यों यूँ ही फिर हँसती हूँ ज़माने भर की कई बातें कह कर गुज़रती  हूँ बड़ी खामोशियाँ है ज़िंदगी में खुद से डरती हूँ तेरे सामने से हर रोज़ में जब भी गुज़रती हूँ तेरे चेहरे की लकीरों को जाने क्यों पढ़ती हूँ रह- रह कर ख्यालों से अपने क्यों यूँ डरती हूँ तुम्हें देख कर जाने क्यों" अरु " यूँ मचलती हूँ आराधना राय "अरु" کوئی وعدہ نہیں پھر بھی جانے کیوں ملتی ہوں تمہیں دیکھ کر جانے کیوں یوں ہی پھر ہنستی ہوں زمانے بھر کی بہت سی چیزیں کہہ کر گزرتی ہوں بڑی كھاموشيا ہے زندگی میں خود سے ڈرتی ہوں تیرے سامنے سے ہر روز میں جب بھی گزرتی ہوں تیرے چہرے کی لکیروں کو جانے کیوں پڑھتی ہوں ره- رہ کر كھيالو سے آپ کیوں یوں ڈرتی ہوں آپ کو دیکھ کر جانے کیوں "ار" یوں مچلتي ہوں آرادنا رائے "ار"

एहसास

मेरे एहसास के हिस्से है जो बिखर गए है नसीबों की तरह समेटे उनको यूँ क्या जो रह गए है मेरे ज़ज़्बातो की तरह तेरी बातों से दुनियाँ  दीवानी होगी मेरी तो दिल में बसी है धड़कनों की तरह नज़र झुका के बैठें है राहों में कभी तो गुज़रोगे तुम इन राहों पे ख़ुदा की तरह ये मुकाम मेरा न तुम्हारा होगा  'अरु  '  अर्श की बात वही है इस ज़मी की तरह आराधना राय 'अरु ' میرے احساس کے حصے ہے جو بکھر گئے نصیبوں کی طرح سمیٹے ان یوں کیا جو رہ گئے میرے ذذباتو کی طرح تیری باتوں سے دنیا دیوانی ہوگی میری تو دل میں بسی ہے دھڑكنو کی طرح نظر جھکا کے بیٹھیں ہے راہوں میں کبھی تو گذروگے تم ان راہوں پہ خدا کی طرح یہ مقام میرا نہ تمہارا ہوگا   'ار' عرش کی بات وہی ہے اس ذمي کی طرح ارادھنا رائے 'ار'

बसेरा

साभार गूगल। । .............  बसेरा ----------------------------------------- बारिशों में घर की छत टपकती रही साथ मेरे यूँ पूरा समंदर रहा आशिया प्यार का था बताते भी क्या मेरे घर में राहतों का बसेरा रहा ना मालूम कैसे वो हालत थे जिन मैं आदमी 'अरु' मर के भी जी गया आराधना राय "अरु " Rai Aradhana ©

बहते धारे में

वक़्त के बहते धारे में हालत अक़्सर बदल ही जाते है एक बून्द है हम पानी की अक्स बदल कर बहते ही जाना है ख़ामोश हो चुके कहने वाले जो थे ज़िन्दगी को ज़ुबान देने वाले आज मेरा कल तेरा बहाना है 'अरु' ज़िन्दगी को किसने अभी जाना है आराधना राय "अरु " Rai Aradhana © وقت کے بہتے دھارے میں حالت اقسر بدل ہی جاتے ہیں ایک بوند ہے ہم پانی کی عکس بدل کر بہتے ہی جانا ہے خاموش ہو چکے کہنے والے جو تھے زندگی کو زبان دینے والے آج میرا کل تیرا بہانہ ہے 'ار' زندگی کو کس نے ابھی جانا ہے ارادھنا رائے "ار" Rai Aradhana © خراب Google Translate for Business:Translator ToolkitWebsite TranslatorGlobal Market Finder Turn off instant translationAbout Google TranslateMobileCommunityPrivacy & TermsHelpSend feedback

دورदूर

साभार गूगल दूर बहुत दूर जाना था मुझे तेरी दुनियाँ में यूँ लौट के ना आना था सख्त राहों पे चल कर मुझे क्यों तेरे पास ही चल के यूँ आना था तंग हालत के मारे थे हमें क्या यूँ हँस के 'अरु' तुझे ही समझाना था आराधना राय 'अरु'     دور بہت دور جانا تھا امجھے تیری دنیا میں یوں لوٹ کے نہ آنا تھا سخت راہوں پہ چل کر مجھے کیوں تیرے پاس ہی چل کے یوں آنا تھا تنگ حالت کے مارے تھے ہمیں کیا یوں ہنس کے 'ار' تجھے ہی سمجھانا تھا ارادھنا رائے 'ار'

उम्र गुज़री عمر گزری

साभार गूगल उम्र शिकवे शिकायत में गुज़री बात कहते सारी रात ही गुज़री कौन आग लगता रहा पानी में सहर तो यूँ दामन बचाते गुज़री ग़ुम गए वो सारे ख़्यालात कही जिनको ढूँढ़ते ये ज़िन्दगी गुज़री दुनियाँ तेरे बाजार में सौदाई सही आब आँखों में लिए राह ये गुज़री ये आँसू भी ग़वारा ना हुए ना सही लबों पे हँसी भी 'अरु ' जां से गुज़री आराधना राय 'अरु '                                                                                                                                                                 عمر شکوے شکایت میں گزری بات کہتے ساری رات ہو گزری کون آگ لگتا رہا پانی می...

बात हुई

साभार गूगल कौन जानें क्या कब ये बात हुई तुझ से यूँ ही नहीं मुलाक़ात हुई कहीं जब झूम के गाता है सावन किसकी आँखों से ये बरसात हुई तन पे बारिश कि कैसी छींट पड़ी मन कि अपने आप से ये बात हुई रंग कच्चे होते तो निकल जाते युहीं ताउम्र ना निकले ये अज़ब बात हुई अब के बरसात में हलचल ख़ास हुई घर में "अरु" बिज़लियाँ मेहमान हुई आराधना राय "अरु" Rai Aradhana ©

आज़ादी के मायने

 साभार गुगल आज़ादी के मायने बदलने ज़रूर  चाहिए हमारे अपनों के नज़रिये बदलने  चाहिए   कुछ कर दिखाने का ज़ज़्बा होना चाहिये हालात बदलने का माद्दा होना तो चाहिए अँधेरी रातों को उज़ाले नये फिर चाहिए सोच कि "अरु"  तस्वीर उभरनी चाहिए Rai Aradhana © आराधना राय "अरु "

प्रयाण

हिमालय की चोटी आवाज़ देती है रगों में नया सा ये उन्वान देती है ---------------------------------------------- रातों को जग कर प्रहरी सा वो  अटल रहा जिसका सीना सदा ही देश के लिए सजा जिसका लहु गंगा सा बह कर पवित्र हुआ हे  वीर आर्येवत पर तुम सदा विजित रहो रण में शौर्य -पताका तुम फहराते ही रहो देख आसमां से कोई शत्रु फिर से आए ना कोई चिंगारी दिखा फिर अब भाग पाए ना सज़ग ,धीरता से अब तुम भी प्रयाण करो आराधना राय "अरु"     

रंज़

    रंज़ मेरा था मेरा, मेरे ही साथ रहा उम्र भर आह कि वो ही सौगात रहा दफ़न हो गए होते हम यूँ यहीं कहीं अब के ज़माना भी मेरे ही साथ रहा वो कहे रात तो रात ही बस मेरी सही गमों का सौदा था हमनें  हँस के सहा जानें कौन बिज़लियाँ रोज़  गिराता रहा  ज़मी पे "अरु"अजब सा  कुफ़्र  ढाता रहा आराधना राय "अरु " Rai Aradhana © ---------------------------------------------------------------- कुफ़्र =attitude of ingratitude and thanklessness मतलबी ,ज़िस पर ईश्वर कि   कृपा ना हो                                                                            

आसान है

कितना आसान है दामन छुड़ा लेना  दूसरों पे हँस  के हर पल बीता लेना किसी की चाहतों से खेलते ही रहना किसी की उम्मीदों पे पानी फेर देना खिलवाड़ कर दिलों  को बहला लेना  ज़ख़्म  पे घाव  सा कर हंसते  रहना  आसान है दिलों से यू  खेलते ही रहना ख़ुद को ख़ुदा सा "अरु" बोलते ही रहना आराधना राय  "अरु" Aradhana ©                             

चुभन

सलीक़े  से उठे बैठे बुज़ुर्गो की ये सब  हिदायत थी करीने से संभाले घर माँ की उम्र भर ये ताक़ीदें  थी नज़रों  को झुका ही घर से वो बाहर ही निकली थी कोई शीशा था चुभा ऐसा की मेरी जां ही निकली थी लबों पे मुस्कराहट ऐसी कि दिलों को बहलाती थी बड़ी ही कैफियत दे कर ख़ुद को सम्हाल लेती थी न जाने क्यों गुलिस्तां को फिर किसी ने उजाड़ा था माँ के आंसुओ  ने रो कर दिल को फिर सम्हाला था ना मालूम क्यूँ  माशरा ये  दुख्तर को ही यूँ रुलाता है लड़कों को माशरा "अरु " कब  ये सबक़ सिखलाता है आराधना राय "अरु" -------------------------------------------------------------- माशरा- society , समाज़  दुख्तर - girl  , लड़की  चुभन