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अटल

अटल विश्वास के लिए साथ  खड़ी हूँ मैं अपने सत्य से भी यू कहीं परे हूँ क्या मैं स्वाधीन, मुक्त हूँ प्रश्न का उत्तर हूँ मैं धरती धरणी धीर सी अम्बर कथा हूँ मैं वीरकण से बनी धीर प्रतिमूर्ति ही  हूँ मैं मौन मूक वेदना कि ये एक कड़ी  हूँ  मैं अटल हूँ सजगता  से खड़ी हुई तो  हूँ मैं जन्मों तुझ से कहीं यू जुड़ी ही रही हूँ मैं सृष्टि कि अनमोल रचना भी रही हूँ मैं दुष्ट भंजनी  बाहुबल , नारायणी  हूँ मैं जीवन दायनी प्रबला मुक्तेश्वरी   हूँ  मैं अनेक रूपा "अरु" स्वरूपा भी तो  हूँ मैं  आराधना राय copyright :  Rai Aradhana   © ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ आज हाथ में छुरी ले कर वो अपना खुदा मार आये है किसी का इश्क़ था इबादत वो भी वो मार कर आये है बेवफ़ाई का इल्ज़ाम दूसरो पर लगाने वालो हँसते हुए घर को भी तबाह यू ही  करने वालों ...

राहत

ना काबा ना काशी में सकूं मिला दिल को दिल से राहत थी जब विसाल -ए -सनम मिला। ज़िंदगी का कहर झेल कर मिला बीच बाज़ार में खुद को  नीलम कर गया यू  हर आदमी मिला राह में वो इस तरह कोई चाहतों से ना मिला रूह बेकरार रहे कोई "अरु" और वो अब्र ना कभी हमसे यू मिला आराधना राय copyright :  Rai Aradhana  ©

चाँद

चाँद के साथ चाँदनी खिलखिलाती रही तेरे बहाने से खुशियाँ दरीचे से आती रही तू सहर सा मेरे दर को रोशन करती रही तू मेरे घर में चाँद बन के जगमगाती रही वो खूबसूरत सा चेहरा ईद सा चाँद ही रही इसी बहाने "अरु"बहार बन के वो आती रही आराधना राय  

सवालात

 एहतमाद के काबिल ना थे उनका ख्याल किए  दिलों में नश्तर चुभा के सौ  सवालात किए तेरी पनाह में झुक कर सज़दे  हज़ार किए उससे जीने के वादे  हमने हज़ार किए वफ़ा कि बातें  हमारी ज़ानिब से  बार-बार किए क़त्ल कि रात हर लम्हा हमारा इंतज़ार किए उसी के नाम का सदका हज़ार बार किए उसी को खुदा मान कर सौ- सौ काम किए अज़ीम ग़ैरत  रही  जिन्होंने  सवालात किए अज़ीब बात है "अरु " तुझसे हर सवाल किए   आराधना राय copyright :  Rai Aradhana  ©

कतरा

ज़िंदगी कतरा कतरा ही तय कि हमने ख़ुशी से ज़्यादा ग़मो को ही जीया हमने वक़्त का खुद इंतज़ार यू ही किया हमने रुखसती पर अपना  मातम किया हमने जीने के बहाने यू ही हज़ार क्यू दिए हमने ज़िंदगी को नए अल्फ़ाज़ क्यू दिए हमने चाँद कि चाँदनी को ना ख़फा किया हमने "अरु"  अश्क़ से ख़ुद  निबाह किया हमने आराधना राय copyright :  Rai Aradhana  ©

ख़ाक

            ख़ाक ------------------------------------------------ ज़िंदगी ख़ाक है और अब कुछ भी नहीं जीते  मरने के सिवा और  कुछ भी नहीं तिज़ारत सा इश्क है और कुछ भी नहीं बेरुखी का आलम है और कुछ भी नहीं एक थकी ज़िंदगी है और कुछ भी नहीं "अरु" ज़ब्र करने के सिवा कुछ भी नहीं आराधना राय copyright :  Rai Aradhana  ©

कफ़स

कफ़स  ------------------------------------------------------------------------------------------------------------ कफ़स में आज़माइश यू रही बरसों मेरी परिंदों कि झलक देखी ना आसमानों में मेरी बातों के रंगे -बू रहे ना यू ही बगानों में मेरी तरह तू भी खिल कभी यू गुलदानो में  दरीचे यू आसमानों कि तरफ भी खुलते रहे  नज़र मेरे कफ़स पर भी यू ही तेरी पड़ती रहे कौन से वादों पे हम यहाँ क्यू  हंस के जी जाए "अरु" अब जिए इस दोज़ख में या  के मर जाए  आराधना copyright :  Rai Aradhana  ©

ख़ामोश

                         ख़ामोश -------------------------------------------- अपनी ख़ामोश सी ज़िंदगी लिए एहसास भी ग़र्क़ दिल में कर लिए किसके उजाले आँखों में बसा लिए मर कर यू  तुझे कुछ पाने के लिए उम्र का एक ये मक़ाम जी ही लिए किसी कि याद बस दिल में यू लिए कोई दर्द था दिल में जहन में लिए "अरु" आँसू कम थे जीने के ही लिए आराधना राय copyright :  Rai Aradhana  ©

दुःख

 दुःख ----------------------- तुम से बात ना हो पाने का दुःख ना जाने कैसे सह गई तुम्हारे सपनों को बिसर जाने का दुःख मौन हो सह गई , ना जाने कहाँ किस मोड़ पर ज़िंदगी तेरे लिए ही रह गई हादिसे दरकिनार करती गई ज़िंदगी और में दरिया सी बह गई "अरु" तेरे बगैर कुछ भी कहीं ना थी सोचती हूँ ना जाने कैसे जी गई आराधना राय copyright :  Rai Aradhana  ©

प्रसाद

क्षुब्ध  हूँ , क्षुधित हूँ.तृषित  हूँ कातर नहीं हूँ. धीर हूँ सतत हूँ जीवन में निरन्तर प्रवाहित हूँ तम  भी हूँ , शशि प्रकाशित हूँ भोर की लालिमा का प्रकाश हूँ सुर से सजी धरा का प्रसाद हूँ ज्ञान की नदी की  एक धार हूँ "अरु" नश्वर हूँ पर दीप्तमान हूँ आराधना राय  copyright :  Rai Aradhana  ©

वज़ह

ज़िंदगी यू ही खुद तू  बर्बाद  है आदतन जुल्म का शिकार  है बात तुझ से यू ही किये जाते है बे वज़ह हम भी जीए ही जाते है कोई तुम सा  यहाँ नही  होता है वक़्त जब मेहरबान यू ही होता है काम कुछ भी नहीं तेरे यू  आता है आदमी जब नाकाम हुआ जाता है कोई अजब सी बात रूह पे तारि है ए "अरु" सफर तेरा भी ये ज़ारी है  आराधना राय copyright :  Rai Aradhana   ©

संधर्ष

   काले बादल  मन कि धरती पर उथल पुथल मचाते है  जब नयन में अश्रु से भर स्मृति दीप वो ही जलाते है   जल -तरंगिणी सी मधुरिम फुहारों में जग लहराते है  नव -गीत प्राणों के यौवन सा जीवन में वो भर जाते है  म्लान क्लांत  तू दिनकर  जब हृदय शुभ्र तू पा जाता है   वेदनाओं से परे रहे वहीं तो  दुःख को भी सह कर जाता है  जल कि बूंदों से भरा जाल ही मेध रथी कहला भी जाता है  "अरू " संधर्ष कैसा भी हो जीवन तो ये चलता ही जाता है  आराधना राय copyright :  Rai Aradhana   ©   

क्या था

aye aru" ---------------------------------------------------  hume khud se koi bhi vasta na tha  zindagi main koi bhi rasta na tha  rahe lambi thi bhut lambi thi mager  mujhe suraj ka yu vasta hi na  tha khoye khud hum apne main yu kahi hame andhero main rasta  na  tha ruh pyasi rahi sadiyao tak yu hi kahi inn uzalo se mera kabhi vasta na tha sapne ankho main yu hi palte kyu rahe hamko in khwabo se vasta  na tha yu tera ruk ker chalan kahta tha kabhi  "aye aru" rasta main koi mila na tha  क्या था ---------------------------------------------------- हमें खुद से कोई भी वास्ता क्या था ज़िंदगी में कोई रास्ता ना था राह लंबी थी बहुत लंबी थी  मगर उसको सूरज से वास्ता ना था खोए यू कहीं खुदा अपने में हम कही हमें अंधेरों में रास्ता ना था रूह प्यासी रही सदियों तक कहीं इन उजालों से "अरु"  वास्ता  ना था copyright :  Rai Aradhana   © -------------------------------------------...

वास्ता क्या था

हमें खुद से कोई भी वास्ता क्या था ज़िंदगी में कोई भी रास्ता ना मिला राह लंबी थी बहुत लंबी थी ये मगर उसको सूरज से वास्ता ना यू मिला खोए यू कहीं खुदा अपने में हम कही हमें अंधेरों में ही कभी रास्ता ना मिला रूह प्यासी रही सदियों तक यू ही कहीं इन उजालों से "अरु"  वास्ता यू ही मिला आराधना राय copyright :  Rai Aradhana   ©