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तक़दीर

एक दिन उसे खुद से मांग लेता तक़दीर जो वो खुद बना गर लेता वो मुझे उस का पता क्या यू देता एक हँसी थी जो वो उधार यू लेता उसकी जानिब से उठा था रंज़ लेता हादसा कम न था  "अरु"  सह वो लेता आराधना राय   "अरु" Aradhana © 

बेवज़ह

जाने कौन बात कर गया था कहीं कैसा वादा था कर  गया था कोई बेवज़ह ही सताता रह गया था कहीं ख़ुदा भी मुस्कुरा कर रह गया कोई वो कौन था तेरे मेरे दरम्यां ही कहीं  हर बात पे  रंज सताता रहा यू कहीं  परखा हर कसौटी पे ज़माने ने कहीं  मेरी अना ही टूटी उस परख में कहीं  बड़ी हसरतों का ज़नाज़ा उठा यू कहीं  खाक़ कर  "अरु" बातें बनाता रहा कहीं  आराधना राय  Aradhana ©  ------------------------------------------------ बेवज़ह- Meaning less. बिना बात  अना- -Self- respect,  स्वाभिमान  दरम्यां- middle/midst/interval, in-between" in ... बीच में     तेरी मानिंद ही है, झील सा गहरा नफ़ासत वाला  इस ज़माने से ही अलग सा  कहीं वो दिखने वाला 

आवाज़

नाकाम उम्मीदो का ज़नाज़ा लेकर  हसरतों को हम क्यू यू ढूँढ़ते ही रहे  बड़ी खामोशियाँ थी तेरे ही शहर में  कौन सा शोर था जिसे झेलते ही रहे  नादानियों के शहर में बर्बादी ये हुई  आवाज़ थी सभी कि जी तोड़ती रही शीशे तमाम टूट गए मेरे ही मकान के  कौन सी शये थी"अरु" भटकती ही रही आराधना राय   Rai Aradhana ©   

छवि

सुन्दर छवि किसने यू ही गढ़ी यहाँ किस कि निशानी रह गई बीते हुए युग कि कहानी कह गई अनजाने से बोल कह चुप हो गई कवि कि कल्पन साकार हो कहीं "अरु"स्वप्न बुन कर वो रह गई आराधना  राय Rai Aradhana ©

नज़्म -जंग सरहदों की

नज़्म -जंग सरहदों की  ------------------------------ ज़ख़्म एक माँ ने भी खाया होगा  दिल उसका भी तो टूटा  ही होगा  बाप कि रूह भी कांप गई यू होगी  कंधो पे जब बेटे को उठाया होगा  किसी के सपने मरे सरहद पे कहीं कहीं तो  आँख में आँसू आया होगा शहीद  कह कर ही पुकारेगा ज़माना  आसमां में कहीं वो मुस्कुराया होगा   गोलियाँ चलती रहेंगी  सरहदों पे यू  कोई उनका भी निशाना बनता होगा  जंग कि कैफ़ियत नहीं होती है कहीं  जो चलाई गई साध कर ही निशाना  ऐसी गोलियों का धर्म होता है कहीं  नहीं ये जानती है हिन्दू , मुसलमान  इनकी भी सरहदे होती है क्या कहीं  करुँ किस बात का ज़िक्र तुझसे "अरु " जंग कैसी भी हो  कोई बेहतरी नहीं होती   आराधना राय   Rai Aradhana ©

अफ़साना

किसका इंतज़ार था तुझे  भी यू ए दोस्त वह कहकशां भी अपने ही साथ ले के गया दामन में सिर्फ़ आँसू थे उसकी ही याद के बीते हुए पल कि वो हर ख़ुशी भी ले के गया ना जाने किस बज़्म  में तुझे वो अब मिले वो जाते हुए "अरु "अपनी दास्ताँ कह गया आराधना राय "अरु"  Rai Aradhana © ------------------------------------------------------ शब्द के अर्थ  बज़्म  -महफ़िल , Gathering   कहकशां - "Highest place" प्यारा , ब्रम्हांड ,   दास्ताँ - story , अफ़साना

ज़ुबाँ

दर्द खुद एक ज़ुबाँ बन जाता  है ख़लिश कि दास्ताँ कह जाता है कोई तुम सा जो यू मिल गया है कोई अब्र का टुकड़ा ही जुड़ गया है मेरी पेशानी पे कुछ वो लिख गया है ख्वाहिशों कि निशानी "अरु" दे गया है आराधना राय "अरु"  Rai Aradhana © (खलिश) Origin: Persian Khalish is an Urdu word, it means "prick, pain, anxiety, apprehension"  हिंदी - दर्द , पीड़ा     पेशानी  -   माथा ,   forehead.-

महज़बीं

                                                                महज़बीं अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है  कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है  तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है  गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ  "अरु" यू भी  सितारों से कोई तो राह गुज़री है  आराधना राय "अरु"  महज़बीं - उम्मींद कि किरण - Mehjabin  is a bright ray of sunshine after a cloudy day..  फ़लक  -  आसमां , स्वर्ग ,संसार      Falak .  Means  universe- 

ना बात करों

साभार गुगल  अब ना मेहताब ना आफ़ताब कि यू  बातें करों रंज कि शाम है अब  ना कोई बात यू बाकी करों  सो गई रात अब ना दिन ये रहा मुझ पे मेहरबान  अब तकाज़ा किसी भी बात का कोई यू हम से करो   बहुत रो कर  दिन काट लिए ना बेकार कि बात  करों  तू मिला "अरु" हँस लिए मुस्कुराने कि ना बात करों  आराधना राय "अरु" 

परमात्मा

 मेरे परमात्मा मेरी आत्मा  हो तुम  अधीर विकल क्यों ये रहे मेरा ये मन  विचारों का कोहराम बना ये कोलाहल   मनवा ना माने रे मेरा ये तो है व्याकुल जग को जगाने वाले तुम को क्या मनाऊँ हे अंतर्यामी कौन सी बतियाँ करू  बताऊँ  शुद्ध परिष्कृत इस जग कि सारी अवधारणा निर्मल ह्रदय में तुम वासित रहे "अरु" भावना आराधना राय "अरु"

आतंक

मन ये आतंक का शिकार व्यर्थ सा क्यों अब हो कहीं खो गया निष्फल हो रही देव साधना और मानव कहीं तिरोहित हो गया मन  बेचैनी का दर्पण सुख पे रीझा दुःख में कुम्हलाया रीत गया जाने कौन सी स्मृति का विस्मित सा यू ही अब तो  हरण हो गया जग बैरी था उसमें जीना व्यवधान सा  दुष्कर यू प्रतीत ही हो गया उन्मुक्त ह्दय भी बेड़ियों के अधीन क्यों अब व्यथित सा हो गया भावनाओं के साथ खेलता ये संसार था जीवन जीना यू प्रश्न हो गया "अरु" साँकल चढ़ा लो दरवाज़ों पे यहाँ अब आतंक का व्यापार हो गया आराधना राय

नमन

हे महादेव करुँ नमन तुम्हें मैं जग के पालनहार तुम उमा पति , तुम कामेश्वर , हे सृष्टि रचयता तुम को बारम्बार प्रणाम , हे अभ्यंकर ,चंद्रचूड़ प्रणिपात आराधना राय  "अरु "करें देव आप को साष्टांग प्रणाम।

ख्याल

                                      ख्याल ---------------------------------------------------------------------- आज कल लोग बिना बात ही यू  बदनाम करते है उसूलन हम भी उन्हें ही तो जा कर सलाम करते है ये और बात है लोग इश्क़ कि  बात यू ही करते है बिना बात के वो ही बस हर बार सवालात करते है है बहुत मुश्किल उनको ही यू भी ये अब  समझाना जो किसी के दिल का भी अब ख्याल ही नहीं रखते है हमें  गम हो के ना हो अब यू ही हम दरकार रखते है पशेमां क्यू हो उन से "अरु" समझ बरक़रार रखते है आराधना राय

सखी मित्र

             सखी ,मित्र -------------------------------------  सुधियों के आँगन में मुस्कुराता है  गीत सा कोई यू ही गुनगुनाता है  उर में जो वह बसा कब का  हुआ है मेरे संग ही तो वह प्रतिपल रहा  है सखी तुम्हारी स्मृति सा वह यू तो है प्रेम तुम्हारा उसमें ही अब साकार है स्वपन का कोई वो नया सा आकाश है ना जाने किस रीत का वह ही आधार है प्रणय -सिंधु सा है वो ही अचल हुआ है प्रीत कि धरोहर हिय में ही सजल हुआ है मित्रता के क्षितिज पे वह हर्षित हुआ है "अरु "नयनों में वो ही तो छाया हुआ है आराधना राय  Rai Aradhana ©

अनकही

                            अनकही --------------------------------------------- अनकही बात होठो में दबा कर जिए ज़िंदगी बोल कब तलक मर कर जिए अपने ज़हन में उजाले लिए हम यू जिए उम्र के हर मोड़ पर आफ़ताब से ही जिए चलना है काम अगर शिद्दत से हम जिए ग़र्क़ हो कर भी "अरु "यू  मेहताब से जिए आराधना राय  Rai Aradhana ©

इंतज़ार

तेरे इंतज़ार में चुप- चाप हम यू ही रोयेंगे अश्को से दामन तेरा हम भी यू भीगोयेंगे  तेरी बातो से मिल जायेगा यू ही क़रार मुझे यु ही दिल -दिल में  प्यार में   भीगोयेंगे  तुझे  उसके ज़ज़्बात भी अपने से ही अब लगने लगे "अरु" वो मुझे अपना हम कदम सा ही लगने लगे आराधना राय  Rai Aradhana © आराधना राय

पहचान

मेरी तुझ से पहचान  ये यू ही नहीं थी तुझ से मुलाक़ात कभी हुई ही नहीं थी तुझ से जन्मों कि बात यू तो नहीं थी  दिल कि ही ये कोई यू ही बात रही थी तुझ से मिलना यू ही इत्तेफ़ाक़ रहा था एक हम ही नहीं बैठे तेरे इंतज़ार में "अरु" आराधना राय 

नाता

मेरा तुझे देखना बेमानी नहीं था दरिया-ए -प्यार तेरा मेरी नादानी नहीं था समुन्दर का  वास्ता दरियाओं से रहा यू तुझ सा मेरा उम्मीदों का कहीं यू नाता नहीं मिला  मेरा  देवालय अधूरा  दीप के बिना मेरी साँसों में जो महका वो "अरु" रिश्ता तुझ से ही मिला आराधना राय 

आस

 यू  सवार है आग अब पानी पे  तेरा जहां है ये क्यू यू निशाने पे अब्र की आस भी है यू अफसाने में रूह ये  प्यासी यू ही कही तीरगी में रंगी सुबह के ही नरम  उजालो पे "अरु" छेड़े हर राग यू ही ख्वाबो पे आराधना राय तीरगी- अँधेरा अब्र - बादल

कलाम को श्रद्धांजलि

कलाम को श्रद्धांजलि -----------------------------------  रोता है ईश्वर भी यू अब तो देख कलाम भी रूठ ही गया     क़ुरान कि इबादत रही उसकी   गीता का जीवन सार ही दिया कर्तव्य, मेहनत और लगन से  ज़ीना ही उसने था सीख लिया  मंदिर , मस्जिद  या  हो गिरज़ा  उसने कर्मों को ही नमन किया   कैसे - कैसे हीरे सब यू ही खोये  हाय विधाता तू क्यों  टूट गया हाथ जोड़ कर हे तुझे ही ईश्वर आज कलाम को नमन किया  दनियाँ के जंजाल में रह कर  "अरु" ये मनवा क्यू रो दिया  आराधना राय