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महज़बीं

                                 

               


             महज़बीं
अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है 
कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है 

तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है
तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है 

गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ 
"अरु" यू भी सितारों से कोई तो राह गुज़री है 
आराधना राय "अरु" 



महज़बीं -उम्मींद कि किरण -Mehjabin is a bright ray of sunshine after a cloudy day.. 

फ़लक - आसमां , स्वर्ग ,संसार     Falak. Means universe- 

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कैसे -कैसे दिन हमने काटे है  अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है दिल में तूफान छुपाये बैठे है  बिन बोली सी जैसे बरसाते है

आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"

श्रद्धांजलि

मेरा बचपन ही साथ लें गए पिता मेरे तुम ईश्वर हो गए मेरे जीवन के वातायन बन मुझे अपने सपनें भी दें गए मुझे नव जीवन यू  देने वाले सागर तीरे ही   पार वो हो गए इस जीवन से विदा लेने वाले उस ईश्वर के कण में खो गए (स्व श्री कैलाश चन्द्र शर्मा  को नमन ४ बरसीं पर))