Skip to main content

Posts

ना बात करों

साभार गुगल  अब ना मेहताब ना आफ़ताब कि यू  बातें करों रंज कि शाम है अब  ना कोई बात यू बाकी करों  सो गई रात अब ना दिन ये रहा मुझ पे मेहरबान  अब तकाज़ा किसी भी बात का कोई यू हम से करो   बहुत रो कर  दिन काट लिए ना बेकार कि बात  करों  तू मिला "अरु" हँस लिए मुस्कुराने कि ना बात करों  आराधना राय "अरु" 

परमात्मा

 मेरे परमात्मा मेरी आत्मा  हो तुम  अधीर विकल क्यों ये रहे मेरा ये मन  विचारों का कोहराम बना ये कोलाहल   मनवा ना माने रे मेरा ये तो है व्याकुल जग को जगाने वाले तुम को क्या मनाऊँ हे अंतर्यामी कौन सी बतियाँ करू  बताऊँ  शुद्ध परिष्कृत इस जग कि सारी अवधारणा निर्मल ह्रदय में तुम वासित रहे "अरु" भावना आराधना राय "अरु"

आतंक

मन ये आतंक का शिकार व्यर्थ सा क्यों अब हो कहीं खो गया निष्फल हो रही देव साधना और मानव कहीं तिरोहित हो गया मन  बेचैनी का दर्पण सुख पे रीझा दुःख में कुम्हलाया रीत गया जाने कौन सी स्मृति का विस्मित सा यू ही अब तो  हरण हो गया जग बैरी था उसमें जीना व्यवधान सा  दुष्कर यू प्रतीत ही हो गया उन्मुक्त ह्दय भी बेड़ियों के अधीन क्यों अब व्यथित सा हो गया भावनाओं के साथ खेलता ये संसार था जीवन जीना यू प्रश्न हो गया "अरु" साँकल चढ़ा लो दरवाज़ों पे यहाँ अब आतंक का व्यापार हो गया आराधना राय

नमन

हे महादेव करुँ नमन तुम्हें मैं जग के पालनहार तुम उमा पति , तुम कामेश्वर , हे सृष्टि रचयता तुम को बारम्बार प्रणाम , हे अभ्यंकर ,चंद्रचूड़ प्रणिपात आराधना राय  "अरु "करें देव आप को साष्टांग प्रणाम।

ख्याल

                                      ख्याल ---------------------------------------------------------------------- आज कल लोग बिना बात ही यू  बदनाम करते है उसूलन हम भी उन्हें ही तो जा कर सलाम करते है ये और बात है लोग इश्क़ कि  बात यू ही करते है बिना बात के वो ही बस हर बार सवालात करते है है बहुत मुश्किल उनको ही यू भी ये अब  समझाना जो किसी के दिल का भी अब ख्याल ही नहीं रखते है हमें  गम हो के ना हो अब यू ही हम दरकार रखते है पशेमां क्यू हो उन से "अरु" समझ बरक़रार रखते है आराधना राय

सखी मित्र

             सखी ,मित्र -------------------------------------  सुधियों के आँगन में मुस्कुराता है  गीत सा कोई यू ही गुनगुनाता है  उर में जो वह बसा कब का  हुआ है मेरे संग ही तो वह प्रतिपल रहा  है सखी तुम्हारी स्मृति सा वह यू तो है प्रेम तुम्हारा उसमें ही अब साकार है स्वपन का कोई वो नया सा आकाश है ना जाने किस रीत का वह ही आधार है प्रणय -सिंधु सा है वो ही अचल हुआ है प्रीत कि धरोहर हिय में ही सजल हुआ है मित्रता के क्षितिज पे वह हर्षित हुआ है "अरु "नयनों में वो ही तो छाया हुआ है आराधना राय  Rai Aradhana ©

अनकही

                            अनकही --------------------------------------------- अनकही बात होठो में दबा कर जिए ज़िंदगी बोल कब तलक मर कर जिए अपने ज़हन में उजाले लिए हम यू जिए उम्र के हर मोड़ पर आफ़ताब से ही जिए चलना है काम अगर शिद्दत से हम जिए ग़र्क़ हो कर भी "अरु "यू  मेहताब से जिए आराधना राय  Rai Aradhana ©

इंतज़ार

तेरे इंतज़ार में चुप- चाप हम यू ही रोयेंगे अश्को से दामन तेरा हम भी यू भीगोयेंगे  तेरी बातो से मिल जायेगा यू ही क़रार मुझे यु ही दिल -दिल में  प्यार में   भीगोयेंगे  तुझे  उसके ज़ज़्बात भी अपने से ही अब लगने लगे "अरु" वो मुझे अपना हम कदम सा ही लगने लगे आराधना राय  Rai Aradhana © आराधना राय

पहचान

मेरी तुझ से पहचान  ये यू ही नहीं थी तुझ से मुलाक़ात कभी हुई ही नहीं थी तुझ से जन्मों कि बात यू तो नहीं थी  दिल कि ही ये कोई यू ही बात रही थी तुझ से मिलना यू ही इत्तेफ़ाक़ रहा था एक हम ही नहीं बैठे तेरे इंतज़ार में "अरु" आराधना राय 

नाता

मेरा तुझे देखना बेमानी नहीं था दरिया-ए -प्यार तेरा मेरी नादानी नहीं था समुन्दर का  वास्ता दरियाओं से रहा यू तुझ सा मेरा उम्मीदों का कहीं यू नाता नहीं मिला  मेरा  देवालय अधूरा  दीप के बिना मेरी साँसों में जो महका वो "अरु" रिश्ता तुझ से ही मिला आराधना राय 

आस

 यू  सवार है आग अब पानी पे  तेरा जहां है ये क्यू यू निशाने पे अब्र की आस भी है यू अफसाने में रूह ये  प्यासी यू ही कही तीरगी में रंगी सुबह के ही नरम  उजालो पे "अरु" छेड़े हर राग यू ही ख्वाबो पे आराधना राय तीरगी- अँधेरा अब्र - बादल

कलाम को श्रद्धांजलि

कलाम को श्रद्धांजलि -----------------------------------  रोता है ईश्वर भी यू अब तो देख कलाम भी रूठ ही गया     क़ुरान कि इबादत रही उसकी   गीता का जीवन सार ही दिया कर्तव्य, मेहनत और लगन से  ज़ीना ही उसने था सीख लिया  मंदिर , मस्जिद  या  हो गिरज़ा  उसने कर्मों को ही नमन किया   कैसे - कैसे हीरे सब यू ही खोये  हाय विधाता तू क्यों  टूट गया हाथ जोड़ कर हे तुझे ही ईश्वर आज कलाम को नमन किया  दनियाँ के जंजाल में रह कर  "अरु" ये मनवा क्यू रो दिया  आराधना राय 

मुस्कुराहट

तुम से दिल कि  तुझ से कोई बात होगी मेरी तुम से कोई यू ही ये बात ज़रूर होगी तेरी मुस्कुराहट यू भी  मेरे पास ही होगी बात है अब वहीं जो कहीं बस ख़ास होंगी तुझसे मिलने कि मुझे भी यू आस होंगी "अरु"यू ज़िंदगी तेरे ही कभी पास होगी आराधना राय

उम्मीद

उम्मीद कि सरजमीं बनी रहे मेरा इश्क़ है जनून खुदा तू यू ही बना रहे।  ज़िंदगी यू ही रवा होती रहे  वफ़ा है सादगी तेरी ये बात मुझ में बनी रहे।  वो हसीन सा इल्ज़ाम दे रहे है  हम भी कोई दर्द दिल में हर लम्हा ही बसा रहे है।  तेरी उम्र -दराज़ यू ही अब रहे हौसला है दिलों में "अरु" जो यू ही बस बना ही रहे। आराधना राय

दफ़न

दफ़न हो गए शब्द जब कारखानों में हसीन पल भी लगे अब क़ैदख़ानों से। मयस्सर  नहीं  जिस्म को कफ़न  भी उगलती है आग कहीं भूख दोज़ख की बंज़र सा इंसान क़ैद है अपनी तड़प में ख़ुशी भी सिमट गई आज अपने घरों में कौन सी सज़ा वो किस तरह पा जाता है "अरु"  वो  शब्दों के मायने बदल जाता है आराधना राय

अटल

अटल विश्वास के लिए साथ  खड़ी हूँ मैं अपने सत्य से भी यू कहीं परे हूँ क्या मैं स्वाधीन, मुक्त हूँ प्रश्न का उत्तर हूँ मैं धरती धरणी धीर सी अम्बर कथा हूँ मैं वीरकण से बनी धीर प्रतिमूर्ति ही  हूँ मैं मौन मूक वेदना कि ये एक कड़ी  हूँ  मैं अटल हूँ सजगता  से खड़ी हुई तो  हूँ मैं जन्मों तुझ से कहीं यू जुड़ी ही रही हूँ मैं सृष्टि कि अनमोल रचना भी रही हूँ मैं दुष्ट भंजनी  बाहुबल , नारायणी  हूँ मैं जीवन दायनी प्रबला मुक्तेश्वरी   हूँ  मैं अनेक रूपा "अरु" स्वरूपा भी तो  हूँ मैं  आराधना राय copyright :  Rai Aradhana   © ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ आज हाथ में छुरी ले कर वो अपना खुदा मार आये है किसी का इश्क़ था इबादत वो भी वो मार कर आये है बेवफ़ाई का इल्ज़ाम दूसरो पर लगाने वालो हँसते हुए घर को भी तबाह यू ही  करने वालों ...

राहत

ना काबा ना काशी में सकूं मिला दिल को दिल से राहत थी जब विसाल -ए -सनम मिला। ज़िंदगी का कहर झेल कर मिला बीच बाज़ार में खुद को  नीलम कर गया यू  हर आदमी मिला राह में वो इस तरह कोई चाहतों से ना मिला रूह बेकरार रहे कोई "अरु" और वो अब्र ना कभी हमसे यू मिला आराधना राय copyright :  Rai Aradhana  ©

चाँद

चाँद के साथ चाँदनी खिलखिलाती रही तेरे बहाने से खुशियाँ दरीचे से आती रही तू सहर सा मेरे दर को रोशन करती रही तू मेरे घर में चाँद बन के जगमगाती रही वो खूबसूरत सा चेहरा ईद सा चाँद ही रही इसी बहाने "अरु"बहार बन के वो आती रही आराधना राय  

सवालात

 एहतमाद के काबिल ना थे उनका ख्याल किए  दिलों में नश्तर चुभा के सौ  सवालात किए तेरी पनाह में झुक कर सज़दे  हज़ार किए उससे जीने के वादे  हमने हज़ार किए वफ़ा कि बातें  हमारी ज़ानिब से  बार-बार किए क़त्ल कि रात हर लम्हा हमारा इंतज़ार किए उसी के नाम का सदका हज़ार बार किए उसी को खुदा मान कर सौ- सौ काम किए अज़ीम ग़ैरत  रही  जिन्होंने  सवालात किए अज़ीब बात है "अरु " तुझसे हर सवाल किए   आराधना राय copyright :  Rai Aradhana  ©

कतरा

ज़िंदगी कतरा कतरा ही तय कि हमने ख़ुशी से ज़्यादा ग़मो को ही जीया हमने वक़्त का खुद इंतज़ार यू ही किया हमने रुखसती पर अपना  मातम किया हमने जीने के बहाने यू ही हज़ार क्यू दिए हमने ज़िंदगी को नए अल्फ़ाज़ क्यू दिए हमने चाँद कि चाँदनी को ना ख़फा किया हमने "अरु"  अश्क़ से ख़ुद  निबाह किया हमने आराधना राय copyright :  Rai Aradhana  ©