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कह जाते हो

आँखों से कौन सी बात कह जाते हो दिल में कहीं तुम समाते ही जाते हो तुम अपने नाम के दिये से जलाते हो होठो पे इक मुस्कान बन छा जाते हो मेरे आँसू भी तुम पी कर चले जाते हो "अरु" को संसार तुम देने चले आते हो आराधना राय 

कमी ना थी

कमी ना थी  ================================================== तेरे शहर में यू तो कुछ कमी ना थी  तेरे बगैर पर मेरे पैरों में ज़मीं ना थी  तुझे  ही ढूँढने राह  में ही निकली थी  तझे दिल कि हालत क्यू पता ना थी   इत्मिनान था हमें कुछ यू कमी ना थी  रौशनी दिल में थी ये ज़मीं ज़मी ना थी  मुराद माँगते क्या जब कहीं कमी ना थी ज़ख़्म दिल मे थे "अरु" शिकायत ना थी   आराधना राय 

रटन

 कौन सी रटन अब  लगाऊँ  मेरे श्याम तुम्हें ही पा जाऊँ  खोल अलकों को बस  अपने  तेरे नाम से उन्हें यू  सजाऊँ  प्रीत कि बंसी सदा सुन जाऊॅ   उर में सदा के लिए बस जाऊँ   "अरु " मीठी तान सुन जाऊॅ  आराधना राय  *alko---kaan

नहीं जानती

नहीं जानती ============================== किस रूप में जन्म लूँगी फिर यह  नहीं जानती हिंदू -मुस्लिम -ईसाई -सिख यह नहीं जानती मेरा -तेरा करने वाले कब थमेंगे नहीं जानती इंसान हूँ ईश्वर को हर रूप में ही हूँ बस मानती कब छीटा कशी छोड़ेगा इंसान ये नहीं जानती औरों के मान को कोई ना डसेगा नहीं जानती किसी धर्म के नाम पर दंगा फिर होगा हूँ जानती इस बार कोई एक इंसान मरेगा इतना हूँ जानती आराधना  राय 

सावरे

छोड़ी जग कि लोक लाज कान्हा कि अब हो लू आज मिलने कि  तू ना छोड़ आस अब तो ना बिसारो मेरे नाथ अरु को संभालो सावरे आज आराधना राय

बरसों

ना जाने क्यों कोई साहिल से टकराया बरसों गुज़रते वक़्त को ठहरा हुआ यू ही पाया बरसों ना कारवां ना मंज़िल कोई कहीं भी पाया बरसों इल्ज़ाम हमने खुद ही उठाये यहॉ पे कई बरसों तुझ से अपने दिल का हाल सुनाया यू ही  बरसों रोये तेरे संग भी कभी मुस्कुराये हम कई बरसों जा के वो क्यू ना आये कभी जो गए यहा से बरसों वो हमें खुद ना कभी ढूंढ पाये अपने घर में बरसों आराधना राय ©

कभी

सौ बार मर कर जीये फिर एक बार कभी मेरा नहीं तो कर अपना ही एतबार तू कहीं तेरे लिए इस जहां मे रुकी वो बहार हूँ अभी  आएगी रास तुझको भी मेरी दीवानगी कभी तेरा दामन जो मेरे हाथ से छूटा जो फिर कभी जी कर भी ना जी पायेंगे जन्मों हम फिर कहीं अज़ीब बात है कोई बादल नहीं बरसा ऐसे कहीं ज़मीं प्यासी भी रही होगी "अरु" ना ऐसे  कभी आराधना राय

बना देंगे

तेरी हर बात अफ़साना बना देंगे कल तुझे भी ये दीवाना बना देगे तेरे हर लफ्ज़ को ज़ुदा यू कर देंगे तेरी बात को ये से बेगाना बना देंगे दिल पे  तेरे ही ज़ख़्म तुझे ये यू देंगे तेरे नासूर को जो रोज़ हरा कर देंगे तेरी  आवारगी का ये तुझे सिला देंगे तुझे किसी रोज़ "अरु" ज़हर भी देंगे

देखे कोई

देखे कोई ------------------------------------------------- मैं रास्ता नहीं कि गुज़र गया कोई उम्र कि दहलीज़ पर छोड़ गया कोई कुछ तो तेरा मेरा वास्ता होगा कोई सदियों तक इंतज़ार नहीं करता कोई रूह से रूह का फासला यू हुआ है कोई  जो तेरे मेरे दरम्यान आ गया है कोई उम्मीद दिल से ही लगता है फिर कोई  बात जो रह गई वो ही बताता है यू कोई साथ  ये छूटने वाला कहाँ है  देखे कोई हँस के कह दी है बात "अरु" तुमने कोई आराधना राय                       دیکھے کوئی ------------------------------------------------- میں راستہ نہیں کہ گزر گیا کوئی عمر کہ دہلیز پر چھوڑ گیا کوئی کچھ تو تیرا میرا واسطہ ہوگا کوئی صدیوں تک انتظار نہیں کرتا کوئی روح سے روح کا فاصلہ یو ہوا ہے کوئی جو تیرے میرے درمیان آ گیا ہے کوئی امید دل سے ہی لگتا ہے پھر کوئی بات جو رہ گئی وہ ہی بتاتا ہے یو کوئی ساتھ یہ چھوٹنے والا کہاں ہے دیکھے کوئی ہنس کے کہہ دی ہے بات "ار" تم نے کوئی

सताने आई है

किसकी   याद  थी जो सताने आई है कौन सी  बात पे ये  आँखे भर आई है तुझे याद ना करने कि क़सम खाई है इस बात से दिल पे  चोट क्यू आई  है तू ज़हन में सवालात बन  कर आई है जवाबों कि किताब तू बन नहीं पाई है फैसला तद्बीर से बदलने क्यों आई है  दख़ल दे   'अरु' वो क़त्ल करने आई है आराधना राय

यू ही सही

उसे मेरा चेहरा इस तरह नागवार गुज़रा वो मुझे बिना देखे ही सामने से ही गुज़रा मेरी हर बात का ताल्लुक  उस से  रहा था सफ़र में अनजान क्यों मुझ से ही रहा था कितने हसीं ख्वाबों को रोज़ ही तोड़ा उसने ये दिल ना तोड़ पाया जो  उजड़ा  खुद उसने  दिल के अरमान थे  चलों नए फूल अब चुनें  उज़डा सा इक  दयार है उसे सजा के ही चलें ये तश्नगी मालूम है कुछ पल के लिए ही सही तड़प सहरा कि है 'अरु' देख लो हमें यू ही सही  आराधना राय

खो गई है.

वो सड़क जो तेरे घर तक जाती थी कहीं मुझ से खो गई है. मेरी आँखों से ओझल हो किसी और कि वो अब हो गई है  मालूम नहीं अब किस नाम से मशहूर  वो यहा हो गई है कौन सा मोड़ था मुड़ गए थे और वो यू  ही खफ़ा हो गई है रात कि वीरानियाँ दिल में लिए भटके आज वो चुप हो गई है नया सा नाम लेकर पुराने लिबास में कहा खड़ी हो गई है ज़िन्दगी के कौन से दोराहे पर मुझ से जुदा  हो गई है वक़्त और हालत कि  गर्दिश में यू ही  वो कहीं  फिर खो गई है नाकाम ख्वाहिशें रास्ते के ज़द में मंज़िलों से दूर हो गई है आराधना राय 

आशिकी

वो गम ज़दा था नसीहत ना रास आई उसको परेशां था ज़माना ना कभी बहका पाया उसको  ख्वाब देखने कि कभी भी आदत नहीं थी उसको रात किसी तस्वुर ने फ़िर से चौकाया था उसको कौन  सी हक़ीक़त बयां कर रोकता वो भी उसको वो फूलों कि सेज़ पर नहीं काटो पर बैठता उसको वो आशना था आशिकी ना कभी रास आई उसको अपना दिल लिए वो पत्थर को मनाता रहा बरसों आराधना राय

बात थी

                            बात  थी  कुछ अजीब रात थी ,शायद वो पहली मुलाक़ात थी भीड़ में अकेले थे लेकिन  उसकी अलग पहचान थी  उदास चेहरा पे आँखों में चमक आज भी मुझे याद थी  वो सोचता ज़्यादा था,यही उसकी यही ये खास बात थी  दुनियाँ के तौर तरीकों से नहीं  कोई उसकी पहचान थी  उसकी पेशानियों पे लिखी यू तो हर रोज़ कि ही बात थी  अपने दुख  दर्द से उसकी एक ज़माने से कोई पहचान थी   उसकी ख़ामोश निगाहों में   "अरु " अज़ीब सी  बात  थी  आराधना राय  

खालिश

                   खालिश -------------------------------------------------- मेरे हिस्से में आई  कड़ी धुप थी चाँद रातों कि कहीं सौगात न थी मेरे दामन से भी वो बच कर चला बदनामी कुछ मेरे साथ कम ना थी थी खालिश दिल में तेरी ही यादों कि  बातों कि वो चुभन साथ ही मेरे थी मेरे  दीवानेपन पर यू ही हंस दिए थे  इज़ाफा रुसवाई का "अरु" कर रहे थे   आराधना राय

क्यू

            -------------------------------------------------        ज़ख़्म फिर से  दिल के हरे क्यू हो गए          वो जो कब तलक ही सूख जाने वाले थे          बरसों हम  उन के लिए क्यू जी लिए            अगर वो हम से रूठ के जाने वाले थे           मेरे क़ातिल को पता था मेरा भी मकां            उस से बच कर कब निकलने वाले थे            अजीब बात थी वो शख़्स भी सौदाई हुआ          कल तलक जिस बाज़ार में बिकने वाले थे  आराधना राय  ==================================

सौदा

                       ---------------------------------------------------- एक सौदा कर लिया है इश्क़ के बाज़ार में तेरे  नाम पर मरना जीना तेरे ही नाम पे तुम्हारी आदतों में मेरी आदतें भी शुमार है तेरी  आवाज़ में मेरी आवाज़  का ख़ुमार है ये मिरज़ -ए -इश्क़ है नाकामियों के नाम पे हम खुद आ कर रूक गए है एक तेरे नाम पे साथ तेरे यू चल पड़ा बस  क़ाफ़िला था नहीं हमसफ़र कोई कहाँ था "अरु" तन्हां ही सही आराधना राय

अलख जगाये

अलख जगाये  ====================== अपने नयन खुवायें आज पी ही  लुभाये सखी मुझे पी बुलाए  जिया मेरा क्यू हर्षाए  सोवत  जागत ही तुम संग जन्म ही बिताये ये जग बैरन है  साधु ड़ोर ही अब छूटी जाये आराधना *

आराधना * बाबा नागा अर्जुन और कबीर जी के जन्म विशेष पर

आराधना *  बाबा नागा अर्जुन और कबीर जी के जन्म विशेष पर  -------------------------------------------------------- नमन करुँ उस प्रवीण आत्मा को उससे उपजी गहरी सी साधना को दे रहे  कबीर भी अपनी ओज वाणी नागार्जुन जगा  रहे थे समाज वाणी समाज रहेगा सदा ही अनुग्रह ऋणी  हिंदी भाषा ने पाई थी  समृद्धि धनी  सूर्ये  भी यहाँ झुके नतमस्तस्क हो  कर्म पथ के वीर बात करते गंभीर  आराधना