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खो गई है.





वो सड़क जो तेरे घर तक जाती थी
कहीं मुझ से खो गई है.
मेरी आँखों से ओझल हो किसी और
कि वो अब हो गई है
 मालूम नहीं अब किस नाम से मशहूर
 वो यहा हो गई है
कौन सा मोड़ था मुड़ गए थे और वो यू
 ही खफ़ा हो गई है
रात कि वीरानियाँ दिल में लिए भटके
आज वो चुप हो गई है
नया सा नाम लेकर पुराने लिबास में
कहा खड़ी हो गई है
ज़िन्दगी के कौन से दोराहे पर मुझ से
जुदा  हो गई है
वक़्त और हालत कि  गर्दिश में यू ही  वो
कहीं  फिर खो गई है
नाकाम ख्वाहिशें रास्ते के ज़द में मंज़िलों
से दूर हो गई है
आराधना राय 

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कैसे -कैसे दिन हमने काटे है  अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है दिल में तूफान छुपाये बैठे है  बिन बोली सी जैसे बरसाते है

आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"

श्रद्धांजलि

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