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कवित -परंग

                                    कवित -परंग  -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- बोल कोई मीठे कोई बोलता है वही मन में कहीं समां जाता है भाव विह्ल हो मूक हो जाते है , शब्द नए गढ़ जीवन  पाते  है कोई  रूप रंग  में ढल जाते है फिर भावों में सृजन पलता है सुख सपनों  का यही संसार है बनता सहज़ जीवन आधार है ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ज़िन्दगी आसान नहीं फिर भी चलना होगा रहेंगी बात सदा याद मुझे अब बदलना होगा -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- जाने क्याये  कह जाती है मुझसे यू  हवा रह रह कर कौन सी बात उठी सरे बाज़ा...

ज़िंदगी

 साभार गुगल मैं इंसान बन के  क्या जीती अधूरी बची ज़िंदगी उधार क्या देती आये वो दो बूंद बन कर बरस जाये होठ चुप है मगर मैं ख़ामोश नहीं होती राह कैसी भी थी चुपचाप चले वरना ज़िंदगी में तेरे ज़ीने कि वजह क्या होती मेरी मुट्ठी में सीप बंद रही तेरी फितरत यू सराब में अब कहाँ होती आराधना

गम

साभार गूगल यू ही मिटने के लिए और मिटाने के लिए हसरतें जां क्यू  रहेगी क्या तुझे पाने  के लिए मांगा क्या मिल गया उम्र निभाने के लिए यू ही एतरफ किये जा खुद को भुलाने के लिए अब भी मदहोश किय जा है आये तुझे पाने के लिए दिल में है यू ही वो जले गम -ए  यादों के लिए अब ये ग़फ़लत ही सही एक तुझे पाने के लिए कुछ ना कह सके हम उनको बताने के लिए माना मज़बूर मेरे  हालात  बहुत से  रहे होंगे "अना" आराधना            अना"  माने respectful use as pen name

हौसला

जो कहता है उसे कहने दे , वक़्त के दरिया में बहने दे , आज कहे तो हालत बदल दे मोजों को तो पल में बदल दे अँधेरा जब इतना बढ़ जायेगा सामने कुछ न नज़र आएगा सोच बन के जो  निखर जायेगा राहत-ए -वस्ल को वही पायेगा अपने वादों का जिसको कौल नहीं इमां भी उसका फिर ईमान नहीं इंसान ऐसा भी  अब क्या होगा जिसका रहबर  खुदा  नहीं होगा @आराधना कॉपी राइट  

मित्र के नाम पाती

चला काफिला ये अकेले -अकेले लो अंतिम विदाई  ये अंतिम समय कि परिणय का सूत्र ही प्रेम होता,नहीं सदा बात ,प्रणय कि ही होती नहीं है यहाँ कहते है के मित्र मिलते नहीं ह्रदय ने सुनी कहीं दूर से आवाज़      कैसी थी रात,उस अंधकार में  दुःख कि बातें बनी मित्र का साथ थी एक कि ,दूसरे कि वहीं मन कि बात थी जब दुख ने  दुख को आवाज़ दी आँसुओ को  भी पोंछा, और बात कि                साथ निरंतर तुम्ही ने बस दिया साथ दुख कि बात बनी सुख का आधार     ना था  कोई  बंधु कोई भी  बात साथी यहाँ ये कारवां अब  रुकेगा नहीं चलेगा सदा और  साथ रहेगा  सदा बात उसकी थी जिसने निभाई सदा   @  आराधना  कॉपी राइट मित्र के नाम पाती

हर लड़की

साभार गूगल इमेज सड़क पर चलती हर लड़की कहीं भी दिखी आदमी को मांस  का टुकड़ा  भर ही लगी देखा जिसने भी सिर्फ लड़की तुझे बस एक जिस्म   सा देखा औरत तू महज़ एक  खिलौना है तेरी सोच भी कुछ  तो रही होगी भागती भीड़ में कहीं तू भी यही दुःख के अहसास में भरी होगी काश जान पाता  हर कोई जिस्म से अलग  तू कोई जान  होगी एक ,मरियम सी सीता , सी  या रेहाना  सी किसी कि नज़रें क्यों हो वहशहना सी @ कॉपी राइट आराधना

गुलसिताँ

बुलबुले चहकती थी इसी बाग़ में गुलसिताँ जब महकने  ही लगा रूप, गंघ,रस के सुखी इस संसार में क्यू भागती दौड़ती थी ये  तितलियाँ प्रेम , प्रीत और नेह से थीजब पल्वित कुसुमित सदा नव हार से सुरभित सभी देखती है स्वप्न सुन्दर अब भी देखो  कहीं @कॉपी राइट आराधना  

आँख खुलने से पहले

आँख खुलने से पहले किसी दीदार से पहले आइना क्यू शरमाये हर वक़्त लगा तुम आये किसी का नाम लेकर  तुमने रो दिया होता बहूत था तेरा मिलना तेरा आना क्या कम था चले थे तीर और खंज़र  बिना ही बात  मारे मरे किसी कि आह में मरे किसी कि साँस में जिये 

फलक

उठे है खाक से हम तो फलक तेरे निशाने पे उन्हें भी फिक्र क्या अब इस नए फ़साने पे जुल्म -ए निशा  रहा है तू भी मेरे ठिकाने पे   देखे वादिये जां रूकती है अब किस ठिकाने पे सितम और जुल्म कि रह पे चलने वालो को बड़ी  नागवारिया गुजरी किसी  मरने वालो पे  तेरे भी दिल में  कोई खुदा कही तो  रहा होगा तेरा भी एक कही आशना यू भी तो रहा होगा  आराधना

नीड़

जंग लगी बेड़ियों का फिर ये हार क्यों ------------------------------- --- क्षुब्ध संचित जीवन पर अब ये  प्रहार क्यों --------------------------------------- भ्रमित हो चुके गान सारे नव प्रयाण क्यों  -------------------------------------- भोर कि इस लालिमा पर अश्रु धार क्यों ---------------------------------------  रंग विहीन जीवन पर अब ये श्रृंगार क्यों ----------------------------------------- नीड़ का तेरे मेरेअब  फिर निर्माण क्यों आराधना