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हर लड़की








साभार गूगल इमेज
सड़क पर चलती
हर लड़की
कहीं भी दिखी
आदमी को
मांस  का टुकड़ा
 भर ही लगी
देखा जिसने भी
सिर्फ लड़की
तुझे बस एक जिस्म
  सा देखा
औरत तू महज़ एक
 खिलौना है
तेरी सोच भी कुछ
 तो रही होगी
भागती भीड़ में
कहीं तू भी यही
दुःख के अहसास में
भरी होगी
काश जान पाता
 हर कोई
जिस्म से अलग
 तू कोई जान
 होगी एक
,मरियम सी
सीता , सी  या
रेहाना  सी
किसी कि
नज़रें क्यों
हो वहशहना सी

@ कॉपी राइट आराधना






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आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"

श्रद्धांजलि

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