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गम



साभार गूगल





यू ही मिटने के लिए
और मिटाने के लिए

हसरतें जां क्यू  रहेगी
क्या तुझे पाने  के लिए

मांगा क्या मिल गया
उम्र निभाने के लिए

यू ही एतरफ किये जा
खुद को भुलाने के लिए

अब भी मदहोश किय जा
है आये तुझे पाने के लिए

दिल में है यू ही वो जले
गम -ए  यादों के लिए

अब ये ग़फ़लत ही सही
एक तुझे पाने के लिए

कुछ ना कह सके हम
उनको बताने के लिए

माना मज़बूर मेरे  हालात
 बहुत से  रहे होंगे "अना"

आराधना            अना"  माने respectful use as pen name







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कैसे -कैसे दिन हमने काटे है  अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है दिल में तूफान छुपाये बैठे है  बिन बोली सी जैसे बरसाते है

श्रद्धांजलि

मेरा बचपन ही साथ लें गए पिता मेरे तुम ईश्वर हो गए मेरे जीवन के वातायन बन मुझे अपने सपनें भी दें गए मुझे नव जीवन यू  देने वाले सागर तीरे ही   पार वो हो गए इस जीवन से विदा लेने वाले उस ईश्वर के कण में खो गए (स्व श्री कैलाश चन्द्र शर्मा  को नमन ४ बरसीं पर))

आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"