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सनम



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साभार गुगल
नज़्म बगेर रदीफ और काफिए कि लिखी जाती है---और एक उन्वान पे लिखी जाती है

  सनम
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आज जान पे बन आई है सनम
आग सीने में लगी गई है सनम

पत्थर दिल लिए बैठे है सनम
किस से खेल कर बैठे है सनम
मय मीना और मैखाना लिए है
फिर तुझे ही हम खोजते है सनम

रात  का दिन पर पहरा है कायम 
हम बस तुझे ही  देखते है सनम


आराधना राय "अरु"

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श्रद्धांजलि

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आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"