Skip to main content

दोस्तो देख लो


करम कैसा ये उल्फतो का अजब है दोस्तो देख लो
पड़े हैं  उनकी  रहमतो पर गज़ब  दोस्तो देख लो

खतावार  हुआ खुद  गम का  शिकार रास्ता देख लो
रहम यहाँ किस के दिल के करीब  दोस्तों देख लो

कड़ी दरवाजे की बंद कर के दुनियाँ  से वास्ता देख लो
आँख बंद कर के सहरा -ओं के सराब  दोस्तों देख लो

बड़े अदब का क़ायदा रिवायत उनकी कायदा देख लो
हर इक पल  तराशा उन का हिसाब  दोस्तों देख लो

आराधना राय "अरु"

Comments

Popular posts from this blog

कैसे -कैसे दिन हमने काटे है  अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है दिल में तूफान छुपाये बैठे है  बिन बोली सी जैसे बरसाते है

आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"

श्रद्धांजलि

मेरा बचपन ही साथ लें गए पिता मेरे तुम ईश्वर हो गए मेरे जीवन के वातायन बन मुझे अपने सपनें भी दें गए मुझे नव जीवन यू  देने वाले सागर तीरे ही   पार वो हो गए इस जीवन से विदा लेने वाले उस ईश्वर के कण में खो गए (स्व श्री कैलाश चन्द्र शर्मा  को नमन ४ बरसीं पर))