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याद आई है






मुद्दतों बाद चेहरे पे हँसी आई हैं
जाने क्यों  उस कि याद आई है

वो मुझे रोज़ आ के बता जाता है
या  तो मैं हूँ या मेरी ये  तन्हाई है

उसे भूलने कि आदत बहुत खूब है
मैंने  ना भूलने कि कसम खाई  है

उसकी बातों  से मेरा यही रिश्ता है
उसकी यादें  है जो निभाने आई है
आराधना राय
http://aradhanakissekahaniyan.blogspot.in/




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आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"

श्रद्धांजलि

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