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देखिये

मेरे पहलू में भी आ कर देखिए
दिल से दिल मिलाकर देखिए

मेरे हमदम की गाई ग़ज़ल
साथ मेरे गुनगुनाकर देखिए

नफरतों कि बस्तीयों को भूल कर
प्यार कि दुनियाँ बसा कर देखिए

मुश्किलों में तो थपेड़े धुप के
साथ मेरे भी खा कर देखिए

आप के कन्धे पे रखा है सर
प्यार से थपथपा कर देखिए

लाए है तोहफ़े में हम जां और ज़िगर
आप नजरें उठा कर देखिए

ग़र खता कोई नहीं कि आपने
आँखों से आँखों मिला कर देखिए

चाँद तारों से भला क्या पूछना
"अरु" खुद ही आकर देखिए

आराधना राय "अरु"

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कैसे -कैसे दिन हमने काटे है  अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है दिल में तूफान छुपाये बैठे है  बिन बोली सी जैसे बरसाते है

आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"

श्रद्धांजलि

मेरा बचपन ही साथ लें गए पिता मेरे तुम ईश्वर हो गए मेरे जीवन के वातायन बन मुझे अपने सपनें भी दें गए मुझे नव जीवन यू  देने वाले सागर तीरे ही   पार वो हो गए इस जीवन से विदा लेने वाले उस ईश्वर के कण में खो गए (स्व श्री कैलाश चन्द्र शर्मा  को नमन ४ बरसीं पर))