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ख़्वाहिशें

Pastel Dreams wallpaper by Emerald-Depths





उन से मिलने की ख़्वाहिशें हज़ार की
दिल ने मिल कर साज़िशें हज़ार की
ना जाने कारवां किधर जा रहा था
सबने आरइशे हज़ार की
अपनी ही मस्ती में सब डूबे हुए थे
बस्तियों में रिहाइशें हज़ार की
साथी अजब से राह में मिल रहे थे
सबने सिफारिशें हज़ार की
सफर रास्तों के ना आसान होंगे
कहने को "अरु" ख़्वाहिशें हज़ार की آرادنا رائے ار

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कैसे -कैसे दिन हमने काटे है  अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है दिल में तूफान छुपाये बैठे है  बिन बोली सी जैसे बरसाते है

आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"

श्रद्धांजलि

मेरा बचपन ही साथ लें गए पिता मेरे तुम ईश्वर हो गए मेरे जीवन के वातायन बन मुझे अपने सपनें भी दें गए मुझे नव जीवन यू  देने वाले सागर तीरे ही   पार वो हो गए इस जीवन से विदा लेने वाले उस ईश्वर के कण में खो गए (स्व श्री कैलाश चन्द्र शर्मा  को नमन ४ बरसीं पर))