Skip to main content

ढूंढते रहे


ढूंढते रहे

===============================
तेरी चाहत लिए ना जाने कहाँ यू घूमते  रहे
मंज़िल कि तलाश में जाने क्या यू ढूंढ़ते रहे

वादा नहीं तुझसे फिर सनम तुझे ढूंढते रहे
बोझ कांधे उठा कर सदियों यू ही घूमते रहे

रात दर्द की खामोशियों में तुझे क्यू ढूंढते रहे
ख्वाब था फिर भी सिरहाने तुझे यू ही ढूंढते रहे

किस कशमकश में थे क्यों ये बात पूछते ही रहे
तेरे घर का पता किसी और से हम क्यू पूछते रहे

तेरे बगैर ज़िन्दगी काटी और तुझे  भूलते ही रहे
इसी सोच में जाने किस किस को खुदा बोलते रहे

आराधना राय


Comments

Popular posts from this blog

कैसे -कैसे दिन हमने काटे है  अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है दिल में तूफान छुपाये बैठे है  बिन बोली सी जैसे बरसाते है

ग़ज़ल

लगी थी तोमहते उस पर जमाने में एक मुद्दत लगी उसे घर लौट के आने में हम मशगुल थे घर दिया ज़लाने में लग गई आग सारे जमाने में लगेगी सदिया रूठो को मानने में अजब सी बात है ये दिल के फसाने में उम्र गुजरी है एक एक पैसा कमाने में मिट्टी से खुद घर अपना बनाने में आराधना राय 

आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"