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ज्योति -पुंज



Image result for sunshine साभार गूगल इमेज

ज्योति -पुंज को
देखने  की
क्षमता कहाँ ,
लोग तो केवल
 ज्योति
को पूजेंग।
स्वभिमान कहाँ
नयनों
ये सब अभिमान
को पूजेंगे
दुनियाँ आवाज़ों
 में केवल
सुख को
पूजेंगे

पीर को ना
देख कर
केवल घात
करेंगे
फिर कैसी
अब देखे
बात करेंगे।

आराधना
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कैसे -कैसे दिन हमने काटे है  अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है दिल में तूफान छुपाये बैठे है  बिन बोली सी जैसे बरसाते है

आना

घर भले ही खाली हाथ आ जाना गुज़रा वक्त तूम साथ ले आना हमने जाना नही तुमने माना नहीं कब हुई दोस्ती हमने पहचाना नहीं आसमान मेरे सर पर हमेशा रहा छांव एक टुकड़ा सही संग ले आना जब भी आना मेरे घर तूम ही आना सोई सी  इस नज़्म को बोल दे जाना आराधना राय "अरु"

श्रद्धांजलि

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