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एहसास


दिल के एहसास को ज़िया जाता है
मुस्कुरा के हर दर्द पिया जाता है
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 इश्क़ में बदनाम हुआ जाता है
 रिश्ता  दिल से निभाया जाता है
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चोट लगने पे रोकर सो जाता है
मासूम दिल जब सताया जाता है
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 दामन में सिमट कर  बता जाता है
मेरा अक्स मुझ से  छिपाया जाता है
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दिल के दर्द का पता बता  जाता है
चाँद कि चाँदनी में समाया जाता है
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 कान्धों पे सर रख अश्क बहा जाता है
 ज़िन्दगी तुझ से क्या बताया जाता है
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 बात कर ख़ुद हालात पर रो जाता है
  इल्ज़ाम  "अरु " पर लगाया जाता है
आराधना राय "अरु"














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नज़्म

अब मेरे दिल को तेरे किस्से नहीं भाते  कहते है लौट कर गुज़रे जमाने नहीं आते 
इक ठहरा हुआ समंदर है तेरी आँखों में  छलक कर उसमे से आबसर नहीं आते 
दिल ने जाने कब का धडकना छोड़ दिया है  रात में तेरे हुस्न के अब सपने नहीं आते 
कुछ नामो के बीच कट गई मेरी दुनियाँ  अपना हक़ भी अब हम लेने नहीं जाते 
आराधना राय 




कैसे -कैसे दिन हमने काटे है 
अपने रिश्ते खुद हमने छांटे है

पाँव में चुभते जाने कितने कांटे है
आँखों में अब ख़ाली ख़ाली राते है

इस दुनिया में कैसे कैसे नाते है
तेरी- मेरी रह गई कितनी बातें है

दिल में तूफान छुपाये बैठे है 
बिन बोली सी जैसे बरसाते है

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला