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एहसास


दिल के एहसास को ज़िया जाता है
मुस्कुरा के हर दर्द पिया जाता है
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 इश्क़ में बदनाम हुआ जाता है
 रिश्ता  दिल से निभाया जाता है
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चोट लगने पे रोकर सो जाता है
मासूम दिल जब सताया जाता है
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 दामन में सिमट कर  बता जाता है
मेरा अक्स मुझ से  छिपाया जाता है
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दिल के दर्द का पता बता  जाता है
चाँद कि चाँदनी में समाया जाता है
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 कान्धों पे सर रख अश्क बहा जाता है
 ज़िन्दगी तुझ से क्या बताया जाता है
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 बात कर ख़ुद हालात पर रो जाता है
  इल्ज़ाम  "अरु " पर लगाया जाता है
आराधना राय "अरु"














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महज़बीं

महज़बीं
अब हवाए भी तेरा हर घड़ी नाम लेती है 
कभी रातों को कोई ये नया पैग़ाम देती है 

तुझे ही सोचते ज़िंदगी तन्हां बसर हुई है
तुझे ही देखते यू ही उम्र सारी गुज़र रही है 

गर -चे तू फ़लक था मैं यू भी महज़बीं रही हूँ 
"अरु" यू भी सितारों से कोई तो राह गुज़री है 
आराधना राय "अरु" 



महज़बीं -उम्मींद कि किरण -Mehjabin is a bright ray of sunshine after a cloudy day.. 

फ़लक - आसमां , स्वर्ग ,संसार     Falak. Means universe- 

नज़्म

रोज़ मिलती है सरे शाम बहाना लेकर
जेसे अँधेरे में उजालों का फसाना लेकर

चाँद के पास से चाँदनी का खजाना लेकर
मुझको अनमोल सा एक नजराना देकर

मेरा दर दर नहीं कुछ नहीं है क्या उसका
जब भी मिलती है यही एक उलहना लेकर

रात भर कितने आबशार बहा के जाती है
पर वो जाती है तो किस्मत का बहाना लेकर -
आराधना राय

दो शेर

दो शेर

वो जिधर  निकला काम कर निकला
वो तीर था मेरे जिगर के पार निकला

मेरी खामोशियाँ भी बात मुझे  करती है
तेरी बेवफाईयों को मेरी नजर कर निकला